"क्या गजब का पॉडकास्ट है! जब प्रोफेसर विदिता ने बताया कि हमारा दिमाग 'नेगेटिव इमोशंस' (जैसे डर और तनाव) को तो आसानी से पहचान लेता है लेकिन 'खुशी और संतोष' के लिए कोई एक तय सर्किट नहीं है —इस बात ने सोचने का नजरिया ही बदल दिया। यह भी कमाल की जानकारी थी कि केवल इच्छा रखने से कुछ नहीं होता, सफलता के लिए प्रोसेस से प्यार करना और लगातार काम करना ही दिमाग को सही मायने में मजबूत बनाता है । राज भाई, ऐसे साइंटिफिक और आई-ओपनर एपिसोड्स लाते रहिए!